Wednesday, June 8, 2011

 A truth...
 I have never told you
 Although it is nothing new
 But still I have never told you

 Words are mischievous
 they come & go back
 To frame them , so much time I take.
 Wish this time is not eternity,
 I request words not to play with me
 for god's sake.

 A truth...
 beautiful and surprising
 but neither saying is easy nor hiding

 A truth..
 U might have heard many times
 But trust me,
 it is my first time,
 to say....

 Words are unlimited, seconds are few.
 To reply, U r not compelled to.
 Don't take it otherwise, it is 
 just my feelings my view.

 Actually I...
 Ah! I just...........
 ................can't say.

 A truth...
 Till now I have never told U
 Although it is nothing new
 But still I have never told you

 And shall never tell u
 B'coz.........
 it is inexpressible.......
 that how much..
 I Love U. 


                         - Ritu

Sunday, May 8, 2011

तेरे बिना

तेरे बिना अजनबी ये शहर लगता है 
तेरे बिना मुश्किल हर सफ़र लगता है 
हम बहुत मज़बूत समझते थे खुद को 
पर तेरे बिना हर बात से डर लगता है 
हवाओं का रुख कुछ अजीब है  
कोयल का सुर भी अब मीठा नहीं 
सब कुछ वही अपनी जगह पर है 
बदला बदला सा मगर लगता है 
भीगेंगी पलकें अब की बरसातों में 
हम कह भी न सकेंगे बातों बातों में
तुम्हें देखने का चाव दिल को 
शाम-ओ-सहर लगता है
तुम यहीं हो यहीं कहीं हो  
ऐसा हर पहर लगता है 
तेरे बिना अजनबी ये शहर लगता है 
तेरे बिना मुश्किल हर सफ़र लगता है 

                                            - ऋतु

Saturday, April 30, 2011

जीने से डरते हैं

हम पैदा होते हैं, मर जाते हैं
उन्मुक्तता की आस लिए
जीते है खुद को तृप्त करने की 
एक अनबुझी सी प्यास लिए

कभी आदेश कभी बंधन 
कभी जिम्मेदारी कभी मजबूरी
इनके बीच कब होती हैं
दिल की ख्वाहिशें पूरी

कभी घड़ी के कांटे
बन जाते हैं लाचारी 
जिंदगी से एक एक पल की
कर रखी है उधारी 
  
तमन्नाओ को खुद ही हम 
दिल में दबाने लगते हैं
नकाब ख़ुशी का पहनकर 
हंसने हँसाने लगते हैं 

जिन लहरों से चाहत समंदर की होती है 
उन लहरों को समंदर में उठने ही नही देते हैं
ख्याल तो ख्वाहिशों की देहलीज़ तक पंहुचा देते हैं
पर खुद को हम भीतर घुसने ही नही देते हैं

चाहतों को दिल की कैद में 
हम तड़पने देते हैं
अरमान सिसकना चाहें तो 
उन्हें भी सिसकने देते हैं 

पर पूरा नही कर सकते इन्हें 
न ही ऐसा करते हैं 
जाने क्यूँ हम जिंदगी 
जीने से डरते हैं 

                         - ऋतु

Wednesday, April 20, 2011

तनहा

सितारों ने आज फिर आसमां सजा दिया
तनहा को और भी तनहा बना दिया 

नज़र आते नही फिर भी मीलों के फासले हैं
यकीन होता नही, कभी साथ हम चले हैं 

शोर इतना है की कुछ सुन नही पातीहूँ मैं
और सन्नाटा ऐसा की बातें कह नही सकती तुम्हें

साथ  होने का भ्रम है और साथ कोई नहीं  है
किस  से  कह  रही  हूँ सारी बात, कोई नही है

दोस्त था गर सच में तो अब  कहाँ गया 
तनहा को और भी तनहा बना दिया .....

यहीं गुम हुआ था शायद, यही खो गया था
जानने की कोशिश भी नहीं की कि क्या हो गया था

अब आलम ये है की दिल ही नही तलाशने का
क्यूंकि ...
जो खो गया है वो अब कभी मिलेगा नहीं
और जो मिलेगा उससे खोने  का एहसास मिटेगा नहीं....

तो फिर सितारों की तरह महफ़िल का हिस्सा बने
क्यूँ हर बार इस ही बात पर किस्सा बने

कि हम साथ होकर भी दूर हैं
और इस बात का भी हमें गुरूर है

                                        - ऋतु

Wednesday, April 6, 2011

वही किस्सा वो कहानी,
वही सुना दो तुम.
नहीं रोए हैं कई दिनों से,
कुछ रुला दो तुम.

वो मेरी झुकती निगाहें,
वो तेरी पहली नज़र.
जैसे आँखों में गुजरा हो,
मीलों का सफ़र.
वो ही मदहोशी, वो पहली नज़र 
लौटा दो तुम.

वो घनी झुल्फों में उलझे हुए 
नादाँ लम्हें,
दिल की गहराई से निकले हुए 
वो प्यारे नगमे.
वो ही एहसास, वो जस्बात 
फिर जगा दो तुम.
वो दर्द-ऐ- दिल , वो मायूसी
वो तनहा राते.
वो कसक वो हर पहर 
बस तेरी यादें. 
हो सके तो मेरे ज़ेहन से
सब भुला दो तुम.   
                      
                           - ऋतु

Tuesday, March 1, 2011

तू बस इतना करना

ऐ खुदा 
    तू बस इतना करना 
    मेरी आँखों में सपने देना 
    लाख मुश्किलें हो राहों में,
    मुझे कोशिशें करने देना,
    
    जितना हारूँ मैं 
    जीत की चाहत उतनी बढती जाये
    कोशिशों पर कोशिशें 
    हद से गुजरतीं  जाये 
    सत्य बन कर मेरे दिल में रहना 
    गलत राह पर न बढ़ने देना 
    पर हाँथ न थामना मेरा 
    मुझे कोशिशें करने देना .

    और जब मंजिल मेरी
    मुझे हासिल हो जाये
    ख़त्म सब संघर्ष 
    सारी मुश्किल हो जाये 
    तू विनम्र रखना मुझे
    अहम् में न पड़ने देना 
    तू बस इतना करना 
    फिर से नए सपने देना .

    लाख मुश्किलें हो राहों में,
    मुझे कोशिशें करने देना.
   
                          - ऋतु

Wednesday, February 16, 2011

न मंदिर में दिखाई देता है ,
न मज्जिद  में मिला करता है.
खुदा तो महबूब है मेरा ,
मेरे दिल में रहा करता है.
मैं इबादत ही नहीं इतना 
इश्क करती हूँ उससे ,
की खुद को भी देखूं आईने में ,
तो वो ही दिखाई पड़ता है.